बुधवार, 29 जनवरी 2014

बयान दर्ज है -

मित्रों ! कोलम्बो [श्रीलंका ]से वापसी के बाद आप से रुबरु हूँ |
मधुर स्वप्निल यादों को समेटे आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन की सफलता के लिए प्रायोजकों, हिंदी- सेवियों , भारत सरकार अवं अन्य चेतनशील भाषा विज्ञों का बहुत बहुत आभार ,एवं बधाईयां |
मेरी प्रतीक्षित काव्य श्रंखला में पुस्तक " मधु पर्ण " का विमोचन मेरे लिए सौभाग्य का विषय है |,श्री लंका में भारतीय राजदूत माननीय विनोद पी हँसकमल द्वारा विमोचन व हिंदी के ख्यातिलव्ध विद्वान श्री खगेन्द्र ठाकुर द्वारा " पद्मश्री मुकुटधर पाण्डेय सम्मान " प्राप्त कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ ,इसका श्रेय
आप सभी सुधि मित्रों पाठकों व शुभचिंतकों को जाता है ,हृदय की गहराईयों से आप सबका आभार व्यक्त करता हूँ |
बहा लोगे अश्क तो क्या दर्द का
सिलसिला ख़त्म हो जायेगा -
बहाते हैं सियासतदां अक्सर ,क्या राह
उनकी चल पायेगा -
***

अपने घर के उजाले  को कम न करो
मेरे  घर  का  अँधेरा  बढ़ाओ  नहीं-
दो कदम प्यार के चल सको  तो चलो 
कुफ्र  के  रास्ते  आजमाओ  नहीं  
कल सवेरा यकीनन  तो होगा  उदय 
बदले दीप  के घर जलाओ  नहीं -
तेरे  शहरों  में  सावन  बरसता  रहे 
मेरी  गलियों  में सहरा बसाओ नहीं - 

- उदय वीर सिंह

3 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपको शत शत शुभकामनायें, इस उपलब्धि के लिये।

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30-01-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
आभार

Asha Saxena ने कहा…

उम्दा रचना |