शनिवार, 20 मई 2017

कुछ संवेदना मैं बाजार से खरीद लाया हूँ

कुछ संवेदना मैं बाजार से खरीद लाया हूँ
माडल नंगी थी चित्र रंगों से ढक आया हूँ -
बच्चे के इलाज में किडनी वसूल ली वीर
आराम के लिए नींद की गोली दे आया हूँ
शहर में कुछ बदरंग बस्तियाँ रहें क्यों
शहर से बहुत दूर उन्हें कहीं छोड़ आया हूँ -
माँ बाप से प्यार इतना है कि निः शब्द हूँ
मूर्तियाँ घर में उन्हें अनाथालय छोड़ आया हूँ -
पड़ोसी मेरे धर्म का नहीं कितना बड़ा अनर्थ
दीवार कर ऊंची बहुत रिश्ते तोड़ आया हूँ -
मशालों ने गुमराह कर दिया परछाईयों को
हुत दूर कहीं अँधेरों में उन्हें छोड़ आया हूँ -

उदय वीर सिंह 




1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (21-05-2017) को
"मुद्दा तीन तलाक का, बना नाक का बाल" (चर्चा अंक-2634)
पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक