बुधवार, 12 जुलाई 2017

उन्माद की आँधी क्यों चली

सोच तो है पर संकोच क्यों है 
वीर कातिल भी  निर्दोष क्यों है -
उन्माद की आँधी क्यों चली 
मासूम दिलों में असंतोष क्यों है -
इल्म का दर भी कातिलाना है 
मुर्दा भी सरफरोश क्यों है
जो वतन का है इंसानियत का 
मरने पर अफ़सोस क्यों है -
उदय वीर सिंह


1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (13-07-2017) को "पाप पुराने धोता चल" (चर्चा अंक-2665) (चर्चा अंक-2664) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'